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चित्र गूगल सर्च इंजन से साभार |
वर्षा रानी (गीतिका)
जल बूँदें संजीवन बिखरे
तुम आती तो जीवन निखरे।
बूँदें नाच भिगाती अंचल
रूप धरा का सिंचन निखरे।
रोमांचित तब हरित दूब हो
फल फूलों में जीवन निख्ररे।
तुम नाराज़ कभी मत होना
आस कृषक की जीवन ठहरे।
तीज पर्व तुम बिन नहिं सोहे
कमी तुम्हारी निशदिन अखरे।
आया सावन .....
लो फिर आया सावन
है सबका मनभावन।
तपन घटी हिय हरसे
झूले पड़े झुलावन।
रिमझिम बूँदें झरती
तीज पर्व की आवन।
चूड़ी मेंहदी रचे
सखियाँ कजरी गावन।
शिव पूजा अर्चन से
प्राप्त पुण्यअति पावन।
कुछ हाइकु
(एक)
आया सावनतीज मन भावन
सखी मिलन।
(दो)
पूरी उम्मीदेंवर्षा रिमझिम बूँदें
आई खुशियाँ।
(तीन)
बूँद बौछारगायें गीत मल्हार
सावन प्यार।
(चार)
वर्षा ले आईसूखें में हरियाली
आस जगाई।
(पांच)
वर्षा की बूँदेंक्षणिक बुलबुले दें

(छह)
भीगता तनविरही तप्त मन
लाये सावन।
(सात)
बूँदों की लड़ीसजते पेड़ पौधे
रंगत बढ़ी।
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