मंगलवार, 17 जून 2014
शनिवार, 31 मई 2014
मंगलवार, 13 मई 2014
सोमवार, 12 मई 2014
शनिवार, 26 अप्रैल 2014
'आधुनिक साहित्य' पत्रिका के अप्रैल-जून-2014 अंक में सुबोध श्रीवास्तव की कविताएं...
'आधुनिक साहित्य' पत्रिका के अप्रैल-जून-2014 अंक में सुबोध श्रीवास्तव की कविताए..
http://hellohindi.com/data/documents/Aadhunik-Sahitya-April-June-2014.pdf
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गुरुवार, 20 फ़रवरी 2014
मंगलवार, 12 नवंबर 2013
हरि नारायण तिवारी का गीत
निधरक बहा नहीं जाता है
जो लिखवाना चाह रहे तुम,
मुझसे लिखा नहीं जाता है।।
स्वार्थ सिद्धि की जिसमें रव हो,
जीवित रहते जो मन शव हो।
उसकी कहनी लोक जगत में,
खुलकर कहा नहीं जाता है।।
सुलभ न हो जिस तरुवर के फल,
नित्य नई अभिलाषा प्रति पल।
रसना के उन उच्छवासों में,
निधरक बहा नहीं जाता है।।
हम निर्जन में जन धन वाले,
अपने अन्तर उपवन वाले।
झूम झूमकर उसके रस में,
सुखमय स्वाद नहीं आता है।।
कल्प वृक्ष की हम पर दाया,
सदा सुहावन रहती छाया।
निर्मल रहना जीना सीखा,
कलुषित कर्म नहीं भाता है।।
हम हैं राह बनाते जाते,
सच सबको समझाते जाते,
सभी हमारे हम सबके हैं,
रखता मानवता से नाता।।
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-हरि नारायण तिवारी
बी-112, विश्व बैंक कालोनी,बर्रा, कानपुर-27
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