चित्र गूगल सर्च इंजन से साभार |
प्रियवर, मेरा मन बसंत..
मधुमास में होता है क्यूँ
प्रियवर, मेरा मन बसंत ..
इच्छाएं दरवाजा खोलें
इधर-उधर मनमीत टटोलें
अनजाने कर जाये कोई
मुझमें इंतजार का अंत..
चादर की सिलवट बताये
विरही रात नींद नहीं आये
प्रणय कथा सुनाये कोई
बोलें बैरागी और संत..
अधर धरा को डाली चूमे
पेड़ों बीच बसंती झूमे
पुष्प पराग उड़ाए कोई
साबित कर दे प्यार अनंत..
मदिरालय उतरी आँखों में
रसधार बहती बातों में
ह्रदय चाहता तोड़े कोई
मेरे बंधन सभी तुरंत..
दहक उठे रक्तिम फ्लाश वन
मन में उग आये मधुबन
मरुथल को भीगा दे कोई
मेरी प्यास का हो बस अंत..
मधुमास में होता है क्यूँ
प्रियवर, मेरा मन बसंत ..
बसंत है आज उदास..
आसमान है राज छुपाए
ओस नहीं आँसू टपकाए
खेतों में फूली सरसों
प्रश्नों को हल से बातियाए
नयी फसलों के आंगन अब
आना भूल गया उल्लास
बसंत है आज उदास..
मौसम की रूठी है महफिल
फूलों की डाली है बोझिल
बगिया का सूना है दिल
बसंत को क्या है हासिल
पतझड़ ने रोकी सबकी सांस
बसंत है आज उदास..
तय था खिलना पुष्प खिले नहीं
मिलना तय था वो मिले नहीं
शीतल हवा के रुख बदले हैं
ठंड–धुन्द के पर निकले हैं
कलियों के होठ बंद हैं
कोहरे में खोया विश्वास
बसंत है आज उदास..
अवधेश सिंह
एम.आई.जी/ऍफ़ ऍफ़-1,
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अवधेश सिंह
- जन्म: : जनवरी 4, 1959, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश (भारत)।
- शिक्षा : विज्ञान स्नातक, मार्केटिंग मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा, बिजनिस एडमिनिस्ट्रेशन में परास्नातक तक शिक्षा प्राप्त की है ।
- प्रतिनियूक्ति पर भारतीय सूचना सेवा के वरिष्ठ मीडिया अधिकारी के पद पर भारत सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय के डी.ए.वी.पी. [DAVP] , डी.ऍफ़.पी [DFP] के प्रमुख रहे व पी आई बी [PIB] , समाचार प्रभाग दूरदर्शन तथा आकाशवाणी विभागों से सम्बद्ध रहे [1989 -1995] ।
- साहित्यक यात्रा : 1972 में आकाशवाणी में पहली कविता प्रसारित हुई मात्र तेरह वर्ष की बालावस्था में, स्कूल, विद्यालय से कालेज स्तर तक लेख , निबंध , स्लोगन , कविता लिखने का एक क्रम नयी कविता , गीत , नवगीत , गज़ल , शब्द चित्र , गंभीर लेख , स्वतन्त्र टिप्पड़ी कार , कला व साहित्यक समीक्षक की विधाओं के साथ आज तक निर्बाध जारी है ।
- अस्सी -नब्बे के दशक में मौलिक रचनाएँ व लेख, सांस्कृतिक समीक्षायें आदि दैनिक जागरण , दैनिक आज, साप्ताहिक हिदुस्तान , धर्मयुग आदि में प्रकाशित हुए तब के समय ब्याक्तिगत रूप से धर्मयुग के श्री गणेश मंत्री , साप्ताहिक हिंदुस्तान की श्रीमती म्रनाल पान्डे , दैनिक जागरण के स्व श्री नरेन्द्र मोहन व वरिष्ठ पत्रकार स्व श्री जीतेन्द्र मेहता , वरिष्ठ पत्रकार स्व श्री हरनारायण निगम का सानिध्य व सुझाव दिशा निर्देश प्राप्त का सौभाग्य मिला था जो आज भी अविस्मरनीय है. प्रख्यात साहित्यकार, हिंदी प्रोफ़ेसर, पत्रकार डाक्टर स्व. श्री प्रतीक मिश्र द्वारा रचित " कानपुर के कवि " एक खोज पूरक दस्तावेज में प्रतिनिध ग़जल- कविता व जीवन परिचय का संग्रह 1990 में किया गया था । नव निकस , परिंदे , मंजूषा ,संवदिया आदि गंभीर साहित्यक पत्रिकाओं और नेट पत्रिकाओं में लगातार रचनाएँ प्रकाशित हो रहीं हैं ।
- संपादन व प्रकाशन कार्य यात्रा : सामाजिक संस्था अशोक क्लब की वार्षिकी सामाजिक गृह पत्रिका अनुभूति के संपादन व प्रकाशन कार्य 1979 से 1981 तक किया , मीडिया अधिकारी के रूप में लगातार 1990 से 1995 तक सम्बंधित नगरों की डायरी सूचना प्रसारण मंत्रालय हेतु प्रस्तुत की. दूरसंचार विभाग की विभागीय प्रकाशन गृह पत्रिका गंतव्य कानपुर 1995 से 1998 तक, विभागीय प्रकाशन गृह पत्रिका हिमदर्शन शिमला 2000 से 2002 तक में सम्पादकीय सहयोग का कार्य किया इसके अतिरिक्त दूरदर्शन शिमला ,आकाशवाणी तथा स्थानीय मंचों पर काव्य पाठ के साथ विभागीय राज-भाषा कार्यों में सतत संलग्नता नें हिदी साहित्य की उर्जा का लगातार उत्सर्जन किया है ।
- प्रकाशित किताबें-
- -प्रेम कविताओं पर आधारित संकलन "छूना बस मन" [2013 ]
- -सामाजिक विघटन ,मूल्यों -आस्थाओं पर कविताओं का संग्रह "ठहरी बस्ती ठिठके लोग " [2014]
- प्रकाशाधीन पांडुलिपियाँ : आवारगी (गजल संग्रह ) , नन्हें पंक्षी (बाल कविताओं का संगह )
- सम्पादन : अंतर्जाल साहित्यक-सांस्कृतिक पत्रिका www.shabdsanchar.in
- अन्य संपर्क : https://www.facebook.com/awadheshdm , www.hellohindi.com
- सम्प्रति : वर्तमान में ग्रेड-ई 5 सीनियर एक्जीक्युटिव अधिकारी पद पर भारत संचार निगम लिमिटेड के कार्पोरेट आफिस नयी दिल्ली में कार्यरत हैं।
बहुत बहुत धन्यवाद सुबोध जी ,हार्दिक आभार - अवधेश सिंह
जवाब देंहटाएंaapki rachnaon ka sada swagat hai awadhesh ji..
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