कमला कृति

बुधवार, 18 जुलाई 2018

सबरंग: 'ख्वाबों के पैरहन' का लोकार्पण


'ख्वाबों के पैरहन' का लोकार्पण करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार गंगा प्रसाद विमल ।

       
       " संयुक्त उपन्यास लेखन विधा में यह उपन्यास जरूरी दखल रखता हुआ लेखिका बहनो संतोष श्रीवास्तव और प्रमिला  वर्मा द्वारा लिखा गया निश्चित ही अपनी विशेषताओं से पाठकों को  आकर्षित करेगा ।" ये वाक्य विश्व पुस्तक मेले के लेखक मंच पर ख्वाबों के पैरहन का लोकार्पण करते हुए मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार गंगा प्रसाद विमल ने अपने वक्तव्य में कहे ।

        कार्यक्रम उपन्यास के प्रकाशक किताब वाले पब्लिकेशन द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष मशहूर साहित्यकार दिविक रमेश ने भी उपन्यास के प्रति शुभकामनाएं व्यक्त की तथा उपस्थित श्रोताओ को  उपन्यास का समर्पण पढ़कर सुनाया। "औरत के लिए ......जिसका कभी कुछ नहीं होता ,मगर रच देती है संसार नया।" उन्होंने इस समर्पण की प्रशंसा की । अपने वक्तव्य में संतोष श्रीवास्तव ने जहां एक ओर उपन्यास की रचना प्रक्रिया का और उसके पात्रों के साथ खुद को ढाल लेने का रोचक वर्णन किया वहीं दूसरी ओर प्रमिला वर्मा ने बताया कि "उपन्यास के 16 अध्याय में से 8 मैंने और 8 संतोष ने लिखे । जबकि हम कहानी बिल्कुल डिस्कस नहीं करते थे।" कार्यक्रम का संचालन दिल्ली के करोडीमल कॉलेज के प्रोफेसर संजय वर्मा ने किया।

          समारोह में वर्धा से आये महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्व विश्वविद्यालय वर्धा के डीन डॉ अंकित, झांसी से आए साकेत सुमन चतुर्वेदी, मुम्बई से आए वरिष्ठ पत्रकार लेखक हरीश पाठक, शिमला से आए एस आर हरनोट, प्रेम जनमेजय ,गिरीश पंकज ,प्रभा सिंह ,मातृभारती से जयेश खत्री ,रायपुर से मधु सक्सेना ,नीरजा शर्मा सभी की गरिमामयी उपस्थिति में कार्यक्रम संपन्न हुआ।

बुधवार, 11 जुलाई 2018

दस्तक: पाँच गीत-छाया त्रिपाठी ओझा


चित्र गूगल सर्च इंजन से साभार


अन्तर्मन में सुस्मृतियों के.. 


अन्तर्मन में सुस्मृतियों के बीज रोज बो लेती हूँ
याद तुम्हारी आती है तो थोड़ा सा रो लेती हूँ ।

प्रश्न कई जब उठकर दिल में ,
करने लगते खींचातानी !
गढ़ते नहीं भाव भी आकर
फिर से कोई नयी कहानी !

नयनों में ले नीर सुनो तब, पीर सभी धो लेती हूँ, 
याद तुम्हारी आती है तो थोड़ा सा रो लेती हूँ ।

सौतन बनकर बैठ गयी है,
अपने द्वारे भले निराशा !
मगर छिपी इन संघर्षों में
जाने कैसी कोमल आशा !

पलकों में स्वप्निल इच्छाएँ, रखकर मैं सो लेती हूँ,
याद तुम्हारी आती है तो थोड़ा सा रो लेती हूँ ।

दिखे नहीं अपनी भी छाया
धुंध कभी जब आकर घेरे !
पथ में बन अवरोध खड़े हों
पहरों तक घनघोर अँधेरे !

दीप जला तब नाम तुम्हारे,संग सदा हो लेती हूँ !
याद तुम्हारी आती है तो थोड़ा सा रो लेती हूँ ।


जीवन की इस तेज धूप में..


जीवन की इस तेज धूप में
झुलस झुलस मुरझाये सपने !

घर पावन सा वो मिट्टी का
नेह मिले जो अपने हिस्से !
छूट गया अम्मा का आँचल
नहीं  रहे  नानी के किस्से !
गुड्डे गुड़ियों के सँग कितने
हमने  खूब  सजाये सपने !
जीवन की..

पीहर गयी खुशी ज्यों अपने
धड़कन धड़कन भटकें यादें !
अधरों पर है मौन सुशोभित
अंतस  में  चिहुँकें  फरियादें !
देख देख ऋतुओं के मन को
नयनों  ने  छलकाये  सपने !
जीवन की..

विस्मृत हो  जाते दुख सारे,
और न आकर छलतीं रातें !
अपने  पाँव  धरे  फूलों  पर 
साथ  हमारे  चलती   रातें !
निष्ठुर जग के ही द्वारे पर
जा जाकर मुस्काये सपने !
जीवन की..


बैठ भाग्य को जी भर..


बैठ भाग्य को जी भर कोसा !
मेहनत पर अब नहीं भरोसा !!

दरवाजे दीवाली होली 
खाली जेबें खाली झोली 
देख देख मेरी लाचारी 
हँसे गरीबी बस बेचारी
लाकर भोजन जब थाली में
फिर अम्मा ने आज परोसा !

जीवन भर करते मजदूरी 
इच्छाएँ पर रहीं अधूरी 
गिरवी रख कर सब कुछ अपना 
देखा था कुछ माँ ने सपना 
सोच सोच भर अाती आँखें 
कैसे मुझको पाला पोसा !

खाँसे बापू बिना दवाई 
भाई बैठा  छोड़ पढ़ाई 
करके कर्म बहुत है देखा 
किन्तु न बदली अब तक रेखा 
भ्रष्ट बाबुओं के घर चाँदी 
दिन भर चलता चाय समोसा !


हो जाये मन पहले जैसा..


हो जाये मन पहले जैसा !
कह दो मीत आज कुछ ऐसा !

थम जाए नयनों का पानी
रुके हृदय की भले रवानी
नेह सुधा यों बरसाओ तुम
हो जाए फिर चूनर धानी
अगर साथ तुम फिर दुख कैसा !
कह दो मीत..

अंतर की पीड़ा मिट जाए
नजर तुम्हारी आस जगाए
जब जब याद करूँ मैं तुमको
मन का दीप स्वयं जल जाए
क्या करना है रुपया पैसा !
कह दो मीत..

आकर  बैठो पास  हमारे
आँचल में टाँको तुम तारे
फूलों की झुक जाए डाली
और हवा फिर बाल सँवारे
मिल जाए जैसे को तैसा !
कह दो मीत..


कभी नहीं कुछ कहते आँसू ..


कभी नहीं कुछ कहते आँसू !
बस चुपके से बहते आँसू !!

गिरतीं हों ज्यों जल की बूँदें, 
मौन वेदना आँखें मूँदें, 
बहती जाए अविरल धारा, 
पूछ पूछकर दिल भी हारा, 
नयनों तक से अपनी पीड़ा, 
व्यक्त नहीं हैं करते आँसू !
बस चुपके..

इस जग के रिश्ते नातों से,
सब खट्टी मीठी बातों से,
भूल गए कुछ भी अब कहना, 
सीख लिये जैसे चुप रहना,
सारी पीर अकेले छिपकर, 
जाने कैसे सहते आँसू !
बस चुपके..

सुख दुख में भी खूब पले ये,
पुरवाई के संग ढले ये, 
तोड़ चले शब्दों से नाता, 
मुखरित होकर मौन बताता,
मोहक हर शृंगार पुष्प से,
बिना छुए ही झरते आँसू !
बस चुपके..


छाया त्रिपाठी ओझा


जनपद न्यायालय परिसर
निकट - डाक घर
ब्लाक सी -10, फतेहपुर
जनपद -फतेहपुर (उ.प्र)
पिन -- 212601
ईमेल - tripathi.chhaya21@gmail.com

परिक्रमा: डॉ. ऋषभदेव शर्मा सहित दस लेखक-पत्रकार सम्मानित


डॉ. ऋषभदेव शर्मा सहित सम्मानित लेखक-पत्रकार


          लोकतंत्र और समकाल के सापेक्ष साहित्य और मीडिया पर समग्र मंथन


       पुराण-प्रसिद्ध तमसा नदी के तट पर बसे नगर आजमगढ़ में हर दूसरे वर्ष  मीडियाकर्मियों और साहित्यकारों  का जलसा होता जो आजमगढ़ की पहचान और परंपरा में बदलाव का प्रतीक बनता जा रहा “मीडिया समग्र मंथन – 2018” के रूप में  इस वर्ष यह जलसा पिछले दिनों जनपद मुख्यालय के नेहरु हाल में संपन्न हुआ। इस अवसर पर ‘शार्प रिपोर्टर’ द्वारा उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, हैदराबाद के पूर्व आचार्य एवं अध्यक्ष डॉ. ऋषभदेव शर्मा को साहित्य, लोक साहित्य एवं विविध लेखन के लिए ‘विवेकी राय स्मृति साहित्य सम्मान-2018’ से विभूषित किया गया. साथ ही पत्रकारिता व साहित्य जगत  की  दस विभूतियों को आजमगढ़ अंचल की विश्वप्रसिद्ध महान विभूतियों की स्मृति में सम्मानित किया गया।  सम्मानित विद्वानों में डॉ.  योगेन्द्रनाथ शर्मा अरुण को ‘महापंडित राहुल सांकृत्यायन स्मृति साहित्य सम्मान-2018’, गिरीश पंकज को ‘मुखराम सिंह स्मृति पत्रकारिता सम्मान-2018’, जयशंकर गुप्त को ‘गुंजेश्वरी प्रसाद स्मृति पत्रकारिता सम्मान-2018’, पुण्यप्रसून वाजपेयी को ‘सुरेंद्र प्रताप सिंह स्मृति टीवी पत्रकारिता सम्मान-2018’, यशवंत सिंह को ‘विजयशंकर वाजपेयी स्मृति पत्रकारिता सम्मान-2018’, विजयनारायण को ‘शार्प रिपोर्टर लाइफटाइम एचीवमेंट अवार्ड-2018’, सतीश सिंह रघुवंशी को ‘शार्प रिपोर्टर युवा पत्रकारिता सम्मान-2018’ तथा  डॉ. मधुर नज्मी को ‘अल्लामा शिब्ली नोमानी स्मृति अदबी अवार्ड-2018’ दिया गया। सम्मान समारोह की अध्यक्षता वर्धा से पधारे प्रो. देवराज ने की। इस द्विदिवसीय राष्ट्रीय विमर्श के अवसर पर ‘शार्प रिपोर्टर’ मासिक पत्रिका के उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड विशेषांक का विमोचन भी किया गया। 

       उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता रुड़की से पधारे जैन साहित्य के विशेषज्ञ डॉ. योगेंद्रनाथ शर्मा अरुण ने की. उद्घाटन सत्र में दिल्ली से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के चर्चित पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी का  लाइव टेलीकास्ट के माध्यम से संवाद अत्यंत विचारोत्तेजक रहा। उन्होंने प्रतिभागियों के प्रश्नों के बेबाकी से जवाब भी दिए। उन्होंने  कहा कि भारत में राजनीतिक सत्ता ही सब कुछ नियंत्रित करना चाहती है। 
पहले दिन के मुख्य विचार सत्र‘मीडिया, लोकतंत्र और हमारा समय’ का विषय प्रवर्तन करते हुए महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. देवराज ने लोकतंत्र के बारे में लोहिया, अंबेडकर और नरेंद्रदेव के योगदान का  स्मरण किया। उन्होंने तीनों विद्वानों के बारे में बताया कि वे ऐसा लोकतंत्र चाहते थे, जिसमें व्यक्ति महज मत न होकर मूल्य होना चाहिए, सौंदर्य की कसौटी गौर नहीं श्याम वर्ण को होना चाहिए तथा  विचार की आवश्यकता और उसकी स्वतंत्रता के अनुकूल वातावरण होना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि  लोकतंत्र में लोक की भागीदारी कम हुई है तथा  पिछले सात दशक में सबसे अधिक उपेक्षा शिक्षा और संस्कृति की हुई उन्होंने कहा कि जब मीडिया ने अपनी रखवाली करने की कोशिश की तब उसे सकारात्मक बने रहने के नाम पर उद्देश्य से भटका दिया गया है। सकारात्मक मीडिया के नाम पर मीडिया भटकाव की राह पर है। सकारात्मक या नकारात्मक कुछ नहीं होता जो आप देते हैं वही जरूरत है। आज सकारात्मक वह है जो सत्ता को सुख पहुँचाए। मीडिया को इससे बचकर देश के ज़मीनी यथार्थ से जुड़ना होगा अन्यथा आने वाला समय उसे माफ़ नहीं करेगा। 

       ‘मीडिया से उम्मीदें’  पर केंद्रित विचार सत्र में विविध प्रांतों से आए मीडियाकर्मियों ने  अपने अनुभव साझा किए। ‘आज तक’ के पत्रकार रामकिंकर ने कहा कि मीडिया की निष्पक्षता को लेकर कितनी भी आलोचना क्यों न करें लेकिन जब लोग संकट मे होते हैं तो वे अपनी आवाज उठाने के लिए मीडिया के पास ही आते है। ‘मीडिया मिरर’ के संपादक प्रशांत राजावत ने कहा कि मीडिया में जो सच्चाई परोसना चाहता है उनकी आवाज मीडिया के लोग ही निजी स्वार्थ की चाहत में दबा देते हैं। जुझारू पत्रकार अखिलेश अखिल ने बिहार में सत्ताधीशों द्वारा पत्रकारों की आवाज दबाने के लिए अपनाए जाने वाले हथकंडों की जानकारी दी और अपने उत्पीड़न की दास्तां सुनाई।वरिष्ठ पत्रकार जयशंकर गुप्त ने मीडिया को कमजोर करने के लिए सरकार द्वारा बनाए जा रहे मनमाने कानूनों पर सवाल उठाए। पत्रकार अतुल मोहन सिंह ने कहा कि पत्रकार को खबरों के साथ न्याय करना चाहिए। अनामी शरण बबल ने कहा कि हम अंतहीन महाभारतकाल में जी रहे हैं और  समाज नपुंसकता  की ओर जा रहा है। ‘भड़ास 4 मीडिया’ के संचालक एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ यशवंत सिंह ने कहा कि आधुनिक समाज में समस्त परिवर्तन टेक्नालाजी से आए हैं, विचार से नहीं। अतः टेक्नालाजी से ही क्रांति भी लाई जा सकती  है और लोकतंत्र को बचाया जा सकता है।

      दूसरे दिन ‘लोकतंत्र, साहित्य व हमारा समय’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के पूर्व आचार्य  डॉ.  ऋषभदेव शर्मा ने कहा कि भारत में लोकतंत्र अभी प्रयोग की दशा में है तथा उसे असफल घोषित करना जल्दबाजी माना जाएगा। हर चुनाव में भारतीय जनता निरंतर परिपक्वता के प्रमाण देती है और संसदीय लोकतंत्र के निजी प्रादर्श की उसकी तलाश अभी जारी है। उन्होंने आगे कहा कि हमारा समय निस्संदेह खतरनाक  समय है जिसमें सारी दुनिया आतंक, युद्ध और तानाशाही की ओर बही जा रही है लेकिन  सृष्टि का इतिहास गवाह है कि खतरों के बीच ही मनुष्यता ने सदा नई राहें खोजी हैं। वर्तमान में मीडिया और साहित्य को इस चुनौती का सामना करना है और लोकतंत्र के विकेंद्रीकरण द्वारा जनपक्ष को मजबूती प्रदान करने की जिम्मेदारी निभानी है। उन्होंने विरुद्धों के सामंजस्य के भारतीय दर्शन को व्यावहारिक रूप देने का आह्वान करते हुए समकालीन साहित्य के जुझारू तेवर की प्रशंसा की।

       इस सत्र के  मुख्य वक्ता  मदनमोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान, काशी विद्यापीठ के निदेशक प्रो. ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि समाज के कल्याण के लिए लिखा गया साहित्य ही श्रेष्ठ होता है। उन्होंने कहा कि आजादी से राजसत्ता तो मिली मगर विचारसत्ता को भुला दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि नागरिक आचरण गिर रहा है। उस पर संवाद आखिर कब होगा? नागरिक ही पत्रकार, साहित्यकार व मतदाता होता है। उसका आचरण खराब होगा तो लोकतंत्र कैसे आएगा? वरिष्ठ व्यंग्यकार गिरीश पंकज ने अध्यक्षासन से संबोधित करते हुए कहा कि साहसी साहित्यकार और पत्रकार कभी समझौता नहीं करता । उन्होंने कहा कि सही  कलम वही  होती है जो किसी भी परिस्थिति में न रुके, न झुके और न ही बिके। पहले दिन भोजपुरी गायिका चंदन तिवारी की लोक आधारित गीत संध्या विशेष रसपूर्ण  रही तो दूसरे दिन के अर्धरात्रि के बाद तक चले  कवि सम्मेलन व मुशायरे ने आयोजन को नई ऊँचाई दीजिसमें महेन्द्र अश्क, हैदर किरतपुरी, डॉ. मधुर नज्मी जैसे दिग्गज कवियों ने रचना पाठ किया. 

इस अवसर पर  तीन प्रस्ताव भी पारित किए गए जिनमें आजमगढ़ में महापंडित राहुल सांकृत्यायन के नाम पर केंद्रीय विश्वविद्यालय की मांग,  पत्रकारों की राष्ट्रव्यापी सुरक्षा के लिए केंद्र व राज्यों की सरकारों द्वारा  तुरंत प्रभावी कानून बनाए जाने की मांग और अपना दायित्व निभाते हुए पत्रकार की हत्या पर या मौत पर उसके परिवार को शहीद सैनिकों के परिवार जैसी सुविधा दी जाने की माँग की गई।कार्यक्रम का सफल संचालन अमन त्यागी ने किया तो शार्प रिपोर्टर पत्रिका के संपादक अरविंद सिंह व संस्थापक वीरेंद्र सिंह ने अतिथियों का भावपूर्ण स्वागत किया।


प्रस्तुति- डाॅ. चंदन कुमारी 


c/o संजीव कुमार IDAS, 
एकाउंट्स ऑफिस,स्माल आर्म्स फैक्टरी, 
अरमापुर, कानपुर-208009 
उत्तर प्रदेश

सबरंग: ज्योतिष और शैक्षणिक कैरिएर




         जन्मकुंडली का पंचम भाव शिक्षा का होता है। लग्न और नवम भाव पर भी विचार आवश्यक होता है। यदि लग्न का स्वामी पंचम,नवम् या केंद्र भाव में है तो जातक की शिक्षा शानदार होती है।यदि पंचम भाव में सूर्य है तो प्रशासनिक सेवा की तैयारी करना चाहिए। मंगल पुलिस सेवा देता है। शनि तकनीकी फील्ड,विधि और मेडिकल एजुकेशन देता है। चन्द्रमा भी शानदार एकेडमिक एजुकेशन देकर प्रोफेसर बनाता है। शुक्र मीडिया और फिल्म तथा फाइनेंसियल फील्ड सी ए इत्यादि बनाता है। बुध टॉप क्लास का एम बी ए कराता है।

         नवम भाव भाग्य का होता है।यदि नवम भाव में पुण्य ग्रह बृहस्पति,चन्द्रमा,शुक्र बैठा है तो जातक बहुत सफल होता है। पंचम भाव में गुरु और चन्द्रमा का योग जातक को टॉपर स्टूडेंट बनाकर उच्च कोटि का अधिकारी बनाता है। मेष और वृश्चिक राशि के जातक प्रशासनिक सेवा की तैयारी करें। वृष और तुला का बच्चे एम बी ए और पत्रकारिता,लॉ तथा फ़िल्म डायरेक्शन के फील्ड में जाय। मिथुन तथा कन्या के छात्र प्रबन्धन,ला,और टीचिंग फील्ड में प्रयास करें। कर्क और सिंह राशि के बच्चे प्रशासन और उच्च न्यायिक सेवाओं में जाते हैं। धनु तथा मीन के छात्र विद्वान होते हैं। ये किसी फील्ड में जायेंगे टाप पे रहेंगे।
      अंक ज्योतष से जन्मांक 1 के छात्र प्रशासन में ।2 के मेडिकल,3 के प्रशासन तथा ला में,4 के इंजीनियरिंग,5 के मेडिकल,6 के विधि और प्रबंधन,7 के पत्रकारिता और फ़िल्म,8 के इंजीनियरिंग और मेडिकल तथा 9 जन्मांक के विद्यार्थी प्रशासनिक सेवा की तैयारी करें तो बेहतर होगा। इसके अलावा खूब परिश्रम करें।याद रखें कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता। परिश्रम का भाव दशम और पंचम है। जितनी मेहनत आप करेंगे उतनी सफलता मिलेगी लेकिन नवम अर्थात भाग्य भाव का मजबूत होना भी आवश्यक है। यदि भाग्येश केंद्र या त्रिकोण में है तो सफलता जल्द मिलती है।


  • श्री सुजीत जी महाराज


परिक्रमा: मानव संसाधन विकास के नए आयाम’ पुस्तक लोकार्पित


डॉ. मोहसिन उद्दीन की पुस्तक “मानव संसाधन विकास के नए आयाम : भारतीय 
परिप्रेक्ष्य” का लोकार्पण

           
          काचिगुड़ा (हैदराबाद) स्थित बद्रुका कॉलेज के सभाकक्ष में बुधवार को हिंदी अध्यापकों और लेखकों की संस्था ‘हिंदी हैं हम विश्व मैत्री मंच’ की साहित्यिक सभा आयोजित की गई जिसकी अध्यक्षता प्रो. शकुंतला रेड्डी ने की तथा संयोजन डॉ. रियाजुल अंसारी ने किया। मुख्य अतिथि प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने एनआईआरडी में वरिष्ठ प्रोजेक्ट फ़ैकल्टी के रूप में कार्यरत डॉ. मोहसिन उद्दीन की सद्य:प्रकाशित पुस्तक “मानव संसाधन विकास के नए आयाम : भारतीय परिप्रेक्ष्य” को लोकार्पित किया। लोकार्पण वक्तव्य में प्रो. शर्मा ने कहा कि यह पुस्तक प्रबंधन जैसे आधुनिक विषय पर स्तरीय पाठ्यपुस्तकों के अभाव की पूर्ति का एक सफल प्रयास है। उन्होंने प्रत्येक अध्याय में सम्मिलित वास्तविक समस्याओं के अध्ययन और उससे जुड़े अभ्यासों के समावेश की विशेष प्रशंसा की।

             इस अवसर पर डॉ. ऋषभदेव शर्मा के 62वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में उनकी चर्चित स्त्रीवादी काव्यकृति ‘देहरी’ के राजस्थानी अनुवाद की पांडुलिपि अनुवादिका डॉ.मंजु शर्मा द्वारा उन्हें भेंट की गई। मंच की ओर से अतिथियों का स्वागत-सत्कार डॉ. विद्याधर, डॉ. राजेश अग्रवाल, डॉ. पूर्णिमा शर्मा, डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा, डॉ. संध्या दास और शीला इंगले ने किया। समारोह को जीवंत बनाने में चिरक इंटरनेशनल स्कूल की छात्राओं के विचारोत्तेजक प्रश्नों की विशेष भूमिका रही। डॉ. सुषमा, डॉ. बी एल मीणा, डॉ. प्रभा कुमारी, डॉ. सुपर्णा बंद्योपाध्याय, डॉ. सीमा मिश्रा, अशोक तिवारी, फ़ौजिया बेगम, वुल्ली कृष्णा और जयदीप मुखर्जी आदि ने हिंदी भाषा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर इस चर्चा में सक्रिय भागीदारी निभाई ।  


प्रस्तुति : डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा


सह-संपादक : ‘स्रवंति’,
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा,
हैदराबाद-500004.

मंगलवार, 31 अक्टूबर 2017

दस्तक: छगन लाल गर्ग 'विज्ञ' की रचनाएं


चित्र गूगल सर्च इंजन से साभार



चौपाई/ वात्सल्य


कथा भिखारिन हैं दुखदायी,कथन करूँ तो प्राण उबायी।।
मानव सी बस सूरत पायी,सब मिल शोषक करे हँसायी।।

बच्चे तन वसन नही मिलते,मात पिता विवश किसे कहते।।
दूध कहाँ वात्सल्य मिलता,सरल कुसुम सा सुख बहु खिलता।।

सर्दी वर्षा माँ तन मन छिपके,बालक ममता जीवन महके।।
भाग करम जग अंधा रसिया,देख दशा मन भीतर छलिया।।

फूल खिले नवरस तन महकत,कीचड़ लिपटी बालक हसरत।।
आँचल ढकी मनहरण ममता,कुसुम लता मिल सांसे भरता।।

दिव्य नही यह ममता भोली,साधनविहीन लगती बोली।।
कब भर चेतन माँ का आँचल,बाल दूध से होगा माँसल।।

मत हँसो विवश घनी ममता,नन्हा बाल कुपोषित मरता।।
शोषित माँ का दुख कब जाना,वात्सल्य रस भरा खजाना।।


चौपाई-निर्दयता/क्रूरता 


क्रूर भाव से मानव पातक,जीवन उसका दाहक घातक।।
निर्दयता मे ही रस पाता,मानव रूपी पशुता नाता।।

सूली जीसस को लटकाता,छल बल से सच्चे मरवाता ।।
हाथ पेर जब कटते सच के,समझो वह हैं निर्दय झटके।।

मंसूर जगे आत्मा सूली,पीडा भी प्रभु रस में भूली।।
मानव है अति दानव जानो,काम क्रोध लालच विष मानो।।
जब भी मतलब उठता मन में,मानव निर्दय बनता पल में।।


छप्पय छंद


मृदुल प्रकृति रस राग,लावण्य मोहक निखरे।
पवन बहे अनुराग, अलौकिक माया उभरे।

अनंत सौंदर्य राज, प्रभात लालित्य बिखरा।
भीतरी उन्माद भाव,विराट संग मिल निखरा।

खोया जीवन ताजगी में,दिव्य ज्योतिमय भावना।
सतगुरू चरण तन प्राण मे, असीम जागी साधना।।

जीवन बंधन जान,फसा मन मंझधार मे।
मोहिनी रूप जाल,बहा तेज दुख ताल मे।

बंधन बनता राग, वैभव सुख आशा भरी।
आखिर पाता दोष, तृष्णा फल झूठन भरी।

भावी मृत्यु भय फिर बंधे,कल्पित चिंतन दुख सहे।
मानव मन झूठ संग जुडे,राग भय बंध मे बहे।।


छगन लाल गर्ग 'विज्ञ' 


  • जन्मतिथि :13 अप्रैल 1954 
  • जन्म स्थान : गांव-जीरावल तहसील-रेवदर जिला-सिरोही (राजस्थान )। 
  • पिता : श्री विष्णु राम 
  • शिक्षा : स्नातकोतर  (हिन्दी साहित्य)। 
  • राजकीय सेवा : 1978 से 1990 वरिष्ठ अध्यापक । 1991 से  2008 प्राध्यापक  (हिन्दी साहित्य ) 2009 से 2014 प्रधानाचार्य। 30 अप्रैल  2014 को राजकीय सेवा से निवृत्त । 
  • प्रकाशित पुस्तके : "क्षण बोध " (काव्य संग्रह), "मदांध मन" (काव्य संग्रह),"रंजन रस" (काव्य संग्रह), "अंतिम पृष्ठ" (काव्य संग्रह)। 
  • प्रकाशन: अनेकानेक साहित्य पत्र-पत्रिकाओ व समाचार पत्रों में कविता व आलेख प्रकाशित। 
  • वर्तमान मे: बाल स्वास्थ्य  एवं निर्धन दलित बालिका शिक्षा मे सक्रिय सेवा कार्य। 
  • सम्मान : "हिन्दी साहित्य गौरव सम्मान, तुलसी काव्य सम्मान, काव्य कलश सम्मान, श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान।
  • संपर्क : 2 डी 78 राजस्थान आवासन मंडल, आकरा भट्टा, आबूरोड, सिरोही (राजस्थान )। 
  • मोबाइल: 9461449620 
  • ईमेल : Chhaganlaljeerawal@gmail.com 

परिक्रमा: ब्रह्मोत्सव की स्मृतियाँ-ऋषभदेव शर्मा



     भगवान वेंकटेश्वर के वार्षिक ब्रह्मोत्सव-2017 की अविस्मरणीय झाँकी


पहला दिन-22 सितंबर, 2017: आज सुबह मैं तिरुपति पहुँचा। स्टेशन से लगे हुए विशाल भवन 'विष्णु निवासं' में ठहराया गया। शाम को सामान सहित कार से तिरुमला ले आया गया और एसपीटी कॉटेज में टिका दिया गया। यात्रा सुखमय रही। खाली पेट रहा और अवोमिन ले ली थी; यों उल्टी नहीं हुई - जिसके डर से कई साल से यहाँ आना टल रहा था। इस बार भगवान का बुलावा आया तो मैंने सोचा कि भविष्य का किसे पता है इसलिए चलता हूँ। फिर भी कल तक मन टालमटोल कर रहा था कि तबीयत बिगड़ जाए तो क्या होगा। पर भगवान की इच्छा और आज्ञा मानकर आ गया तथा हर प्रकार स्वस्थ रहा।

कहा जाता है कि तिरुपति (श्रीपति) भगवान कृष्ण जी का ऐश्वर्य रूप है और  विट्ठल बाल रूप। भगवान तिरुपति ने ब्रह्मा जी को आश्वासन दे रखा है कि कलियुग के अंत तक यहाँ निवास करेंगे। यह आश्वासन मिलने पर ब्रह्मा जी ने शारदीय नवरात्र में उत्सव मनाया था, इसीलिए इसे ब्रह्मोत्सव कहते हैं। इस पौराणिक मान्यता के अलावा, वैसे सन 977 ईस्वी से इस पर्व के यहाँ निरंतर मनाए जाने के प्रमाण शिलालेखों में मिलते हैं।

आज इस वर्ष का ब्रह्मोत्सव आरंभ हुआ। मुझे इसके हिंदी में सजीव प्रसारण का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आज भगवान के सेनापति विश्वक्सेन की शोभायात्रा निकली जो संपूर्ण व्यवस्था के निरीक्षण और समस्त जगत को आमंत्रित करने का प्रतीक है। इसके बाद यज्ञशाला में मिट्टी का संग्रह करके नवग्रहों के प्रतीक नौ प्रकार के धान्य (नवधान्य) का बीजारोपण किया गया जिसका प्रसारण नहीं किया जाता है। आज के इस पूरे विधिविधान को सेनाधिपति उत्सव और अंकुरारोपण (अंकुरार्पण) कहा जाता है।

उल्लेखनीय है कि 108 वैष्णव दिव्य क्षेत्रों में से केवल इस एक अर्थात श्रीवेंकटेश्वर मंदिर - तिरुमला- में ही वैखानस आगम के अनुसार अर्चना आदि का विधान है; जबकि अन्यत्र पंचरात्र आगम का पालन होता है। कल अर्थात दूसरे दिन 3 बजे ध्वजारोहण होगा। उसके सजीव प्रसारण में भी सम्मिलित रहने का सौभाग्य प्रभु ने प्रदान किया है। अगले दिन हैदराबाद प्रस्थान...! !!ॐ नमो वेंकटेशाय!!

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दूसरा दिन-24 सितंबर, 2017: आज मैं हैदराबाद  लौट आया हूँ। कल अर्थात सितंबर, 2017 (शनिवार) को मुझे 3 बजे से श्री वेंकटेश्वर भक्ति चैनल के तिरुमला स्थित नियंत्रण कक्ष (कैंप) में उपस्थित रहना था - ब्रह्मोत्सव के दूसरे दिन के हिंदी में सजीव प्रसारण के वास्ते। ... और किस्सा यूँ हुआ कि मेरे आग्रह पर दोपहर 12 बजे वाले स्लॉट में मुझे भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन हेतु 'विशेषों' में पंक्तिबद्ध कर दिया गया; समय पर कैंप में आ उपस्थित होने के कठोर निर्देश के साथ। भारी भीड़ के बावजूद अच्छे से दर्शन हुए - 2.30 बजे। ...और मैं बगटुट दौड़ा। लड्डू प्रसाद भी नहीं ले सका। अभी तक अपराधबोध है; पर मुझे दिए गए समय का पालन करने की सदा से सनक रही है। भीड़ के रेले के साथ बहता हुआ बाहर आया तो जमकर वर्षा हो रही थी। कइयों के सतर्क करने पर भी मैं भीगता हुआ भाग लिया। ...अब सुनिए कि मुझे बचपन से ही रास्ते याद नहीं रहते। बहुत बार अपने गाँव और ननिहाल से लेकर पहाड़ पर, समुद्र किनारे और महानगर तक में खोया हूँ! सो, भागा तो दिशा भूल गया। जहाँ 5 मिनट में पहुँच सकता था, भटकता हुआ आधे घंटे में पहुँचा। पूरी तरह तरबतर। सराबोर। पर संतोष यह कि समय पर पहुँच गया। वर्षा के कारण प्रसारण में विलंब हुआ - वह अलग बात है। संस्कृत विद्यापीठ के युवा अध्यापक केशव मिश्र ने श्री वेंकटेश्वर के वार्षिक ब्रह्मोत्सव के दूसरे दिन के कार्यक्रम के सजीव प्रसारण के हिंदी में विवरण देना आरंभ किया और आगे मैंने सूत्र थाम लिया। बारी-बारी से दोनों अपनी बात कहते रहे। 

दूसरे दिन का पहला कार्यक्रम था - स्वर्ण तिरुच्ची उत्सव। यह कार्यक्रम ब्रह्मोत्सवम में 2015 से ही सम्मिलित हुआ है। इसके अंतर्गत श्री वेंकटेश्वर भगवान की उत्सव मूर्ति ( भगवान मलयप्पा) की दोनों देवियों (आह्लादिनी शक्ति श्रीदेवी तथा प्रकृति शक्ति भूदेवी) समेत जगमगाते सोने के रथ पर विराजित करके चारों वीथियों में भव्य शोभायात्रा का किया गया।  स्वर्ण रथ में 30 फुट की भव्य स्वर्णिम पीठ पर स्थापित भगवान की छवि सचमुच
नयनाभिराम ही नहीं, दृष्टि को धन्य करने वाली थी। इस सुदृढ रथ को अनेक भक्त अपने कंधों पर ढोकर जीवन की कृतार्थता पा रहे थे। साथ ही निरंतर चल रहा था - वैदिक ऋचाओं का उच्चार, भक्तिपूर्ण स्तोत्रों का वाचन और गोविंदा-गोविंदा का आनंदघोष। मंदिर के चारों ओर परिक्रमा करता रथ जब अलग अलग वीथियों की अलग अलग दिशाओं में पहुँचता; तो सब ठहर जाते। अर्चकगण हर दिशा में विधिवत कलश से पवित्र जल छिड़कते हुए वैखानस आगम के अनुसार मंत्रों के साथ पूजा करते; और तब फिर रथ को आगे बढ़ाया जाता। लगभग 1 घंटे से अधिक यह स्वर्ण रथ उत्सव चला। वर्षा भी चलती रही। कभी रिमझिम तो कभी झमाझम। इसी बीच रथयात्रा सोत्साह संपन्न हुई। इसके बाद लगभग सवा पाँच बजे सायं से आरंभ हुआ ध्वजारोहण का सजीव प्रसारण।

ब्रह्मोत्सव के अंतर्गत प्रतिदिन भगवान बालाजी अलग-अलग वाहन पर आरूढ़ होकर तिरुमला की वीथियों में
भ्रमण करते हैं। इसके पूर्व इस उत्सव के विधिवत श्रीगणेश के एक और विधान के रूप में गरुड़-ध्वजा फहराई जाती है। गरुड़ भगवान के वाहन तो हैं ही, उनकी पताका पर भी विराजते हैं। निश्चित मुहूर्त में एक शुद्ध वस्त्र को हल्दी में डुबाकर रँगा जाता है। इस पीत वस्त्र को धूप में सुखाकर इस पर गरुड़ और भगवान कृष्ण की आकृतियाँ रेखांकित की जाती हैं। ऋचाओं, सूक्तों और स्तोत्रों के पाठ के साथ अर्चक इस ध्वजा को पुष्पमालाओं के साथ लपेटकर ध्वजस्तंभ पर फहराते हैं। इस अवसर पर आठों दिशाओं के देवताओं सहित समस्त ब्रह्मांड को ब्रह्मोत्सव के दुर्लभ आयोजन में आमंत्रित किया जाता है और संपूर्ण सृष्टि की मंगलकामना की जाती है। यह समस्त उत्सव अत्यंत अनुशासनपूर्वक  समग्र तन्मयता के बीच संपन्न हुआ।  कमेंटेटर के रूप में इस आनंदोत्सव का साक्षी बनकर धन्यता और प्रभुकृपा की अनुभूति हुई। !!ॐ नमो वेंकटेशाय!!


प्रो. ऋषभदेव शर्मा 


(पूर्व आचार्य एवं अध्यक्ष,
उच्च शिक्षा और शोध संस्थान,
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, हैदराबाद)
208-ए, सिद्धार्थ अपार्टमेंट्स,
गणेश नगर, रामंतापुर– 500013 
मोबाइल - 08121435033
ईमेल – rishabhadeosharma@yahoo.com